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अंकिता, केदार, विपिन और नितिन! पहाड़ में गुलदार तो शहर में गुंडों का आतंक

बेहतर भविष्‍य की तलाश में घर से निकले उत्‍तराखंड के कई युवाओं की हत्‍याओं से प्रदेश की कानून-व्‍यवस्‍था पर उठे सवाल

पर्वतीय क्षेत्रों से सुखद भविष्य की उम्मीद और हजारों सपने आंखों में संजोये शहरों का रूख करने वाले युवाओं के साथ हिंसा और अपराध ग्राफ एकाएक बढ़ने लगा है। नौकरी और पढ़ाई के लिए पहाड़ों से शहरों की ओर पलायन बढ़ रहा है लेकिन यहां आकर वे या तो सिस्टम की बलि चढ़ रहे हैं या फिर अपराध का शिकार हो रहे हैं। अंकिता भंडारी, विपिन रावत के बाद अब नितिन भंडारी की निर्मम हत्या से लोग सकते में आ गये हैं। पुलिस हिरासत से गायब केदार भंडारी प्रकरण की गुत्थी भी अब तक नहीं सुलझी है। एक के बाद एक जिस तरह से युवाओं की हत्याएं हो रही हैं उससे राज्य की कानून व्यवस्था पर तो सवाल उठता ही है, साथ ही यह सवाल भी है कि आखिर अपराध पर अंकुश कैसे लगेगा? शांतिप्रिय माहौल वाले उत्‍तराखंड के सामने यह एक नई चुनौती है।

पर्वतीय क्षेत्रों में बेहतर शिक्षा, कोचिंग और नौकरी के अवसर न होने के कारण अपने भविष्य के लिए युवा शहरों का रूख कर रहे हैं। जैसे पौड़ी की अंकिता भंडारी अपने पिता का सहारा बनने के लिए नौकरी करने घर से निकली लेकिन शोषण का शिकार हो गई। पौड़ी का केदार भंडारी अग्निवीर की भर्ती के लिए गया, वापसी में ऋषिकेश में पुलिस ने चोरी के आरोप में पकड़ा और उसके बाद वह पुलिस कस्टडी से गायब हो गया। उसके माता-पिता आज तक न्‍याय की गुहार लगाते हुए दर-दर भटक रहे हैं। देहरादून में चमोली निवासी लैब टेक्‍नीशियन विपिन रावत पर मामूली कहासुनी में बेसबाल बैट से जानलेवा हमले और उसकी मौत ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। विपिन का हमलावर जमानत लेकर आराम से खुलेआम घूमता रहा और पुलिसवाले समझौते का दबाव बनाते रहे। विपिन की मौत के बाद जब विपक्ष के नेता जब सड़कों पर उतर आए तब जाकर हत्‍यारों की गिरफ्तारी हुई।

इसी बीच, हरिद्वार जिले के भगवानपुर में एक दवा कंपनी के कर्मचारी नितिन भंडारी की हत्‍या हत्‍या का मामला समाने आया है। जांच में पता चला कि नितिन की हत्‍या करने के बाद हत्‍यारों ने दो दिन तक उसके शव को अनाज के टंकी में रखा और खुद भी उसी कमरे में रहे। जिन किराएदारों पर हत्‍या का आरोप है उनका मकान मालिक ने सत्‍यापन भी नहीं कराया था। फिलहाल मामले की छानबीन चल रही है।

राज्य आंदोलनकारी और अधिवक्ता प्रमिला रावत का कहना है कि राज्य के युवाओं की जिस तरह से हत्याएं हो रही हैं और कानून-व्यवस्था लचर है उससे हर राज्यवासी दुखी है। अंकिता भंडारी, कमलेश रावत, पिंकी, दिल्ली में किरन नेगी से लेकर नितिन भंडारी की हत्या तक का मामला बेहद दुखदायी है। अंकिता भंडारी मामले में आज तक वीआईपी के नाम पर खुलासा नहीं हुआ। राज्य में कानून व्यवस्था बेहद खराब है। अपराधी अपराध करने से घबराता नहीं है क्योंकि वह जानता है कि कुछ ही दिनों में बाहर आ जाएगा। सरकार इस ओर ध्यान क्यों नहीं दे रही है। पहाड़ों में बाघ, गुलदारों का डर है तो शहरों में आ कर युवा गुंडागर्दी का शिकार हो रहे हैं। आखिर प्रदेश के युवा कहां जाएं?

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