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अंकिता हत्याकांड: 500 पन्नों की चार्जशीट मगर वीआईपी के नाम पर सस्पेंस!

एसआईटी की 500 पन्नों की चार्जशीट में 100 गवाह और 30 से ज्यादा दस्तावेजी साक्ष्य, लेकिन वीआईपी के नाम का खुलासा नहीं

उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच का एक चरण पूरा कर विशेष जांच दल (एसआईटी) ने चार्जशीट तैयार कर ली है। अभी चार्जशीट अभियोजन कार्यालय में भेजी गई है। इसे सोमवार को कोर्ट में दाखिल किया जाएगा। एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) वी. मुरुगेशन ने एक प्रेस वार्ता में बताया कि 500 पन्नों की चार्जशीट में 100 गवाह हैं साथ ही 30 से ज्यादा दस्तावेजी साक्ष्य शामिल किए हैं। एसआईटी ने मामले के तीनों अभियुक्तों पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता के खिलाफ आईपीसी की धारा 302/201/120बी/354क तथा 5(1)बी अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम के तहत चार्जशीट फाइल की है। इसमें तमाम वैज्ञानिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को शामिल किया गया है। एडीजी मुरुगेशन का कहना है कि नारको टेस्ट एवं अन्य बिन्दुओं पर विवेचना जारी रहेगी। 

अंकिता हत्याकांड में वीआईपी के नाम पर सस्पेंस बरकरार है। इस बारे में पूछे जाने पर एडीजी मुरुगेशन ने कहा कि गेस्ट हाउस में एक रूम को ही वीआईपी नाम दिया गया है। इसके अलावा उन्होंने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी। इससे पहले कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल भी कह चुके हैं कि वीआईपी एक रूम का नाम है। बता दें कि 22 दिसंबर को आरोपियों की गिरफ्तारी के तीन माह पूरे हो रहे हैं। इससे पहले चार्जशीट दाखिल होनी जरूरी थी। उसी दिन नार्को टेस्ट की सुनवाई भी है।

वीआईपी के नाम पता लगाने के लिए एसआईटी ने अदालत से आरोपियों के नार्को टेस्ट की अनुमति मांगी थी। पुलकित और सौरभ भास्कर ने नार्को टेस्ट के लिए हामी भर दी थी, लेकिन तीसरे तीसरे आरोपी अंकित ने दस दिन का समय मांगा है। अब सबकी निगाहें कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। यह पूरा मामला अंकिता के दोस्त की कोशिशों से उजागर हुआ था। तभी से अंकिता पर किसी वीआईपी को ‘स्पेशल सर्विस’ देने का दबाव बनाने का संदेह जताया जा रहा है। हत्याकांड की जांच के दौरान पुलकित आर्य के रिजार्ट पर बुलडोजर चलाने और आग लगने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

पुलिस के मुताबिक, क्या था घटनाक्रम

पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में एडीजी वी. मुरूगेशन ने बताया कि 19 सितंबर को पुलकित आर्य पुत्र विनोद कुमार निवासी गंगाभोगपुर, तल्ला यमकेश्वर द्वारा राजस्व क्षेत्र पट्टी उदयपुर, पल्ला न0 2, पौड़ी गढ़वाल में अपनी रिजार्टकर्मी अंकिता भंडारी पुत्री विरेन्द्र सिह भंडारी की रिजॉर्ट से गुमशुदगी दर्ज करायी थी। जिलाधिकारी के आदेश पर यह मामला 22 सितंबर को नियमित पुलिस को स्थानांतरित किया गया। मामले की विवेचना थाना लक्ष्मणझूला में तैनात एसएसआई मनोहर सिंह रावत के सुपुर्द की गयी। 

घटनास्थल के निरीक्षण व रिजार्ट में मौजूद रिजार्टकर्मियो से पूछताछ करने पर पाया कि 18 सितंबर की सांय करीब 8 बजे अंकिता भंडारी वादी पुलकित आर्य, मैनेजर सौरभ भास्कर व अंकित उर्फ पुलकित गुप्ता के साथ रिजार्ट से गई थी और उसके पश्चात किसी भी रिजार्टकर्मी ने अंकिता को रिजार्ट में नहीं देखा। घटनास्थल से महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के पश्चात रिजार्ट के मैनेजर सौरभ भास्कर, पुलकित आर्य व अंकित ऊर्फ पुलकित गुप्ता को कब्जे में लिया गया, जिनसे अंकिता भंडारी के गुम होने के सम्बन्ध में कड़ाई से पूछताछ की गयी तो उन्होंने अंकिता भंडारी को चीला नहर कुनाउ पुल के पास नहर में धक्का देकर उसकी हत्या करने की बात कबूल की। इसके पश्चात अभियुक्त पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर व अंकित उर्फ पुलकित गुप्ता द्वारा अंकिता भंडारी की हत्या किये जाने के सम्बन्ध में धारा 302, 201, 120 बी भादवि की बढ़ोतरी कर 23 सितंबर को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया। 

अभियुक्तों से पूछताछ में बताये गये कुनाउ पुल चीला नहर में पानी रुकवा कर अंकिता की तलाश की गयी तो 24 सितंबर को एक महिला का शव चीला पॉवर हाउस इनटेक में नहर में मिला। उक्त शव की पहचान अंकिता के परिजनों द्वारा उनकी पुत्री अंकिता भंडारी के रुप में की गयी। चूंकि यह अपराध जघन्य था, इसलिए 24 सितंबर को डीआईजी (लॉ एंड आर्डर) पी. रेणुका देवी के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर विवेचना सुपुर्द की गयी। साथ ही मृतका अंकिता भंडारी के शव को पंचायतनामा कार्यवाही के पश्चात पोस्टमार्टम हेतु एम्स अस्पताल भेजा गया, जहां पर डाक्टरों का एक पैनल गठित कर अंकिता भंडारी के शव के पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी करायी। यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त की जा चुकी है। 

एडीजी मुरुगेशन ने बताया कि एसआईटी द्वारा जांच के दौरान कई गवाहों के बयान दर्ज किये गये, साथ ही महत्वपूर्ण गवाहों के धारा 164 के अंतर्गत बयान न्यायालय में दर्ज कराये गये। जांच के दौरान गवाहों से जुटाए गए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों तथा घटनास्थल से प्राप्त इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को एफएसएल परीक्षण हेतु भेजकर परीक्षण परिणाम प्राप्त किये गये है। इस मामले में सम्पूर्ण साक्ष्य जुटाने के बाद 17 दिसंबर को तीनों अभियुक्तों के विरुद्ध धारा 302/201/120बी/354क भादवि व 5(1)बी अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम में आरोप-पत्र माननीय न्यायालय को प्रेषित किया जा रहा है। 

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