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बजट 2022: उत्तराखंड के लिहाज से दो अहम घोषणाएं पर ग्रीन बोनस की आस अधूरी

उत्तराखंड को ग्रीन बोनस मिलने की आस इस बार भी अधूरी, पर्वतमाला और वाइब्रेंट विलेज योजना का मिलेगा लाभ

उत्तराखंड को ग्रीन बोनस मिलने की आस इस बार भी अधूरी, पर्वतमाला और वाइब्रेंट विलेज योजना का मिलेगा लाभ

मंगलवार को पेश हुए वित्त वर्ष 2022-23 के आम बजट में उत्तराखंड को ग्रीन बोनस मिलने की आस अधूरी रह गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण के बजट भाषण में पर्वतीय राज्यों का जिक्र तब आया, जब उन्होंने पर्वतमाला नाम के नेशनल रोपवे डेवलपमेंट प्रोग्राम का ऐलान किया। दुर्गम पर्वतीय इलाकों में आवाजाही और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए साल 2022-23 में पीपीपी के आधार पर 8 रोपवे प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे। ये रोपवे प्रोजेक्ट किन राज्यों में शुरू होंगे, फिलहाल इसकी जानकारी नहीं दी गई है। उत्तराखंड में चुनाव आचार संहिता लागू होने की वजह से सीधे तौर पर राज्य के लिए घोषणा करना संभव नहीं है। केदारनाथ और हेमकुंड साहिब में रोपवे प्रोजेक्ट का ऐलान हो चुका है। संभवत: ये दोनों प्रोजेक्ट पर्वतमाला परियोजना में शामिल होंगे। पीएम-गतिशक्ति के तहत देश में बनने वाले 25 हजार किलोमीटर के राजमार्गों में उत्तराखंड के कई प्रोजेक्ट शामिल हो सकते हैं।

उत्तराखंड के लिए दूसरी महत्वपूर्ण घोषणा वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम है। देश की उत्तरी सीमा से लगते गांवों में संपर्क और सुविधाएं बढ़ाने के लिए वाइब्रेंट विलेज योजना की शुरुआत की गई है। इन गांवों में सड़क, बिजली, पानी, आवास और कनेक्टिविटी के साथ-साथ आजीविका के अवसर भी मुहैया कराए जाएंगे। इस योजना का लाभ उत्तराखंड के पांच जिलों के सीमावर्ती गांवों को मिल सकता है।

हालांकि, प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के हश्र और पर्वतीय क्षेत्रों की चुनौतियों को देखते हुए दुर्गम इलाकों में वाइब्रेंट विलेज बनाने की राह आसान नहीं होगी। पहाड़ से पलायन रोकने और उत्पादकता को बढ़ाने के लिए ठोस रणनीति और कारगर योजना की जरूरत है। वित्त मंत्री के पूरे बजट भाषण में कहीं भी पलायन, बेरोजगारी और उत्पादकता के संकट से जूझ रहे उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य की आर्थिक तरक्की के बारे में कोई व्यापक नीति या दृष्टिकोण नहीं दिखा। बजट के भारी भरकम दस्तावेजों से भी बात यह नदारद है। देश में 11 हिमालयी राज्य हैं जिनके आर्थिक विकास के लिए पूरे देश से हटकर बजट, नीतियां और कार्यक्रम बनाने की जरूरत है।

उत्तर पूर्व के लिए वित्त मंत्री ने पीएम-डिवाइन नाम से 1500 करोड़ रुपये की योजना का ऐलान जरूर किया है। लेकिन समान जरूरतों वाले उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को कुछ खास नहीं मिला। उत्तराखंड में लंबे समय से राज्य को विशेष दर्जा और ग्रीन बोनस दिए जाने की मांग उठ रही है। लेकिन यह मांग इस साल भी अधूरी रह गई।

आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार कर्नल अजय कोठियाल ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्रीय बजट ने साफ कर दिया है कि भाजपा उत्तराखंड के विकास के लिए गंभीर नहीं है। हर बार की तरह इस बार भी उत्तराखंड के ग्रीन बोनस की आस टूटी है। कोठियाल का कहना है कि उत्तराखंड देश के ऑक्सीजन टैंक की तरह काम करता है। राज्य की पर्यावरणीय सेवाओं का मूल्य 95 हजार करोड़ रुपये आंका गया है। ग्रीन बोनस न मिलने से प्रदेश के पांच साल में 35 हजार करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा है। भाजपा के डबल इंजन ने हर बार उत्तराखंड को ठगा है।

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