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हार के जिम्मेदारों पर हार की समीक्षा का जिम्मा!

उत्तराखंड में कांग्रेस की हार के लिए जिन नेताओं को जिम्मेदार माना जा रहा है, पार्टी ने हार की समीक्षा का जिम्मा उन्हीें को सौंप दिया।

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली हार की समीक्षा का दौर चल रहा है। लेकिन ताज्जुब की बात है कि हार की समीक्षा का जिम्मा प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव और स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष अविनाश पांडे को दिया गया। जबकि इन दोनों नेताओं ने टिकट वितरण और चुनाव प्रबंधन में अहम भूमिका निभाई थी। इस तरह कांग्रेस के जो नेता हार के लिए जिम्मेदार हैं, हार की समीक्षा का जिम्मा भी उन्हीं को मिला है। दो दिन चली मंथन बैठक में पार्टी उम्मीदवारों, पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं के साथ हार के कारणों पर चर्चा की गई। लेकिन इस मंथन में प्रदेश नेतृत्व की खामियों पर लीपापोती का प्रयास ज्यादा हुआ। कांग्रेस की कमियों से ज्यादा भाजपा ने क्या किया उसकी चर्चा रही।

चुनाव सामूहिक लड़ा, समीक्षा अकेले में

समीक्षा बैठक में देवेंद्र यादव और अविनाश पांडे ने उम्मीदवारों को अलग-अलग बुलाकर उनका फीडबैक लिया। सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस ने हार के कारणों की समीक्षा के लिए सामूहिक बैठक से परहेज किया। माना जा रहा है कि सामूहिक बैठक में प्रदेश प्रभारी और प्रदेश नेतृत्व की आलोचनाओं से बचने के लिए नेताओं को अलग-अलग बुलाकर बात की गई। फिर भी कई उम्मीदवारों ने प्रदेश नेतृत्व और संगठन की कमियों पर सवाल उठाए।

विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पांचों राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों से इस्तीफा मांग लिया था। इसलिए उत्तराखंड कांग्रेस के अध्यक्ष गणेश गोदियाल को भी इस्तीफा देना पड़ा। लेकिन प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव अपने पद पर बने हुए हैं। उम्मीदवारों के चयन से लेकर पार्टी के चुनाव प्रबंधन में देवेंद्र यादव ने अहम भूमिका निभायी थी। अविनाश पांडे खुद स्क्रिनिंग कमेटी के अध्यक्ष थे। पूरे चुनाव पर देवेंद्र यादव की टीम हावी थी, जिसकी वजह से स्थानीय नेता उपेक्षित महसूस कर रहे थे। पार्टी में गुटबाजी पर अंकुश लगाने में भी यादव नाकाम रहे।

देवेंद्र यादव कब देंगे इस्तीफा?

कांग्रेस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने मंथन बैठक में प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव और केंद्रीय पर्यवेक्षक अविनाश पांडे को इस्तीफा देने का सुझाव दे डाला। दोनों को काफी खरी-खोटी सुनाते हुए उन्होंने कहा कि आप दोनों को हार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, इससे कार्यकर्ताओं में सही संदेश जाएगा। दो दिन चली समीक्षा बैठक में कांग्रेस के कई पदाधिकारी समीक्षा के तौर-तरीकों को लेकर नाखुश दिखे।

सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पर हार का ठींकरा

केंद्रीय पर्यवेक्षक अविनाश पांडे ने कांग्रेस की हार के लिए भाजपा द्वारा मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मुद्दे को हवा देने और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को मुख्य वजह माना है। पांडे ने कहा कि कांग्रेस ने उत्तराखंड के विकास, महंगाई, बेरोजगारी और पलायन जैसे जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर चुनाव लड़ा था, मगर भाजपा ने पूरा चुनाव सांप्रदायिकता की तरफ मोड़ दिया। उन्होंने माना कि कांग्रेस अपनी बात को जनता तक ठीक से नहीं पहुंचा पायी। चुनाव में जो भी कमियां रह गई हैं कि उसकी रिपोर्ट जल्द ही राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंपी जाएगी।

टिकट बेचने का आरोप लगाने वाले रणजीत को नोटिस

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पर टिकट बेचने का आरोप लगाने वाले कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष रणजीत रावत को कारण बताओ नोटिस दिया गया है। केंद्रीय पर्यवेक्षक अविनाश पांडे ने कहा कि उनका जवाब आने के बाद आगे कार्रवाई पर निर्णय किया जाएगा। रणजीत रावत ने हरीश रावत के रामनगर से चुनाव लड़ने का भी विरोध किया था, जिसके चलते हरीश रावत को लालकुआं से चुनाव लड़ना पड़ा।

प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष को लेकर खींचतान

हार की समीक्षा से ज्यादा उत्तराखंड कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बनने को लेेेकर खींचतान मची है। चुनाव जीतकर आए 19 में से 11 विधायक हरीश रावत के साथ माने जा रहे हैं, इसलिए नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी किसी रावत समर्थक को मिलने के कयास लगाए जा रहे हैं। फिर नेता प्रतिपक्ष के तौर पर प्रीतम सिंह का कार्यकाल भी खास प्रभावशाली नहीं रहा है। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के इस्तीफे के बाद नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं। भाजपा ने 10 के दिन के मंथन के बाद मुख्यमंत्री का नाम फाइनल किया, लेकिन कांग्रेस अभी तक नेता प्रतिपक्ष का नाम तय नहीं कर पायी है।

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